परसा मलिक पुलिस का दोहरा चरित्र उजागर: आश्वासन पर धरना समाप्त कराया, अब थाने में करा रही है पंचायत, 2 महीने तक क्यों सोती रही पुलिस?
परसा मलिक / महराजगंज। जिगिना गांव में भैंस प्रकरण में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भैंस मारने वालों पर मुकदमा न दर्ज करने, विदेश गए निर्दोष ग्रामीणों को शांति भंग में पाबंद करने और गांव में नोटिस भेज कर दहशत फैलाने से नाराज जिगिना के ग्रामीण दो दिन तक चौराहे पर पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठे रहे।
ग्रामीणों का आक्रोश देख उच्च अधिकारियों के निर्देश पर थानाध्यक्ष परसा मलिक मौके पर पहुंचे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन देकर सोमवार को धरना समाप्त करा दिया।
लेकिन आश्वासन सिर्फ 48 घंटे ही टिका।
बुधवार सुबह होते ही थानाध्यक्ष अपने वादे से मुकर गए। कार्रवाई करने के बजाय दोनों पक्षों के लोगों को थाने पर बुलाकर पंचायत का नाटक शुरू करा दिया।पंचायत कराना गलत नहीं है, सवाल नियत पर है।जब जिगिना और गंगवलिया गांव के बीच दो महीने से तनाव चल रहा था, शांति भंग का अंदेशा था, तब परसा मलिक पुलिस ने दो महीने तक हीलाहवाली क्यों की? घटना के तुरंत बाद दोनों पक्षों को बैठाकर निस्तारण क्यों नहीं कराया?आखिर कौन सी अदृश्य शक्ति थी जो दो महीने तक थानाध्यक्ष को गांव में जाने से रोक रही थी?सबसे बड़ा सवाल – परसा मलिक पुलिस जनता को क्या संदेश देना चाहती है?क्या गरीब की भैंसा मारना अपराध नहीं है? क्या विदेश में रह रहे लोगों को कागजों में शांति भंग का मुलजिम बनाना ही पुलिस की “शिकार प्रणाली” है?क्या इस तरह की पुलिसिंग से सरकार की छवि पर बट्टा नहीं लग रहा है? योगी सरकार में जहां अपराधियों पर कार्रवाई का दावा है, वहीं परसा मलिक में पीड़ित को ही नोटिस थमाकर चुप कराया जा रहा है।क्या जिले के जिम्मेदार अधिकारियों ने ही थानाध्यक्ष को इस तरह लेट-लतीफी का निर्देश दिया है? यदि नहीं, तो इस पूरे प्रकरण का दोषी कौन है – शिकायतकर्ता, भैंस मारने वाले, या स्वयं थानाध्यक्ष?ग्रामीणों में इस दोहरे रवैये को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है फिल हाल आगे ग्रामीणो का रुख क्या होगा इसकी दिशा व दशा पंचायत की सफलता और असफलता के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इस संबंध में जब थानाध्यक्ष परसा मलिक विवेक सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि थाने के बाहर बैठकर गांव के लोग पंचायत कर रहे हैं पुलिस का उसमें कोई रोल नहीं है आप जो उचित समझे लिखे आप स्वतंत्र हैं।





















