कटाई से पहले खेतों में बिछी धान की फसल, – —— किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश और तेज हवा से जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में फसल को नुकसान की आशंका, किसानों ने सर्वे कर मुआवजे की उठाई मांग
यूपी टाइम्स समाचार
महराजगंज। अम्बिका दत्त चौबे/उमेश चौरसिया
महराजगंज जनपद में 24 सितंबर से रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कटाई के लिए तैयार हो चुकी धान की फसल तेज हवा और बारिश के चलते खेतों में बिछ गई है। कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर फसल गिरने से किसानों को उत्पादन प्रभावित होने के साथ आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।
किसानों के लिए यह समय धान की कटाई की तैयारी का था, लेकिन मौसम के बदले मिजाज ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल के गिर जाने से किसानों के सामने अब कटाई और फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
मेहनत और लागत के बाद मौसम की मार
किसानों का कहना है कि इस बार धान की फसल तैयार करने में उन्हें काफी मेहनत और खर्च करना पड़ा। महंगे बीज, खाद, जुताई, सिंचाई, कीटनाशक और मजदूरी सहित कई मदों में लागत बढ़ी है। किसानों के मुताबिक खाद की उपलब्धता को लेकर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। कई किसानों को खाद के लिए घंटों कतार में खड़ा होना पड़ा, जबकि कुछ किसानों ने पर्याप्त खाद नहीं मिलने पर निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदकर खेती की।
किसानों का कहना है कि तमाम मुश्किलों के बाद जब फसल पककर कटाई के लिए तैयार हुई तो बारिश और तेज हवा ने उनकी उम्मीदों को झटका दे दिया।
जमीन पर गिरी फसल से बढ़ेगी कटाई की मुश्किल
धान की फसल जमीन पर गिर जाने से कटाई में अतिरिक्त मेहनत और खर्च लगने की आशंका है। किसानों के अनुसार गिरी हुई फसल को काटने में समय अधिक लगेगा। इसके साथ ही खेत में पानी और नमी बनी रहने पर फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की भी चिंता है। किसानों को उत्पादन में कमी और तैयार उपज के खराब होने का डर सता रहा है।
इन क्षेत्रों में भी दिख रहा बारिश का असर
मोरवन,मधुबनी,चौक, नाथनगर,परासखांड, बेलभरिया,कम्हरिया, धरमौली,कसमरिया, अरनहवा,खजुरिया, बसवार,पड़री खुर्द, पिपरा सोनाड़ी, मिश्रौलिया, परसा राजा, दरहटा, चैनपुर, बसंतपुर राजा, सिंदुरिया, बागापार,परतावल, सिसवा,ठूठीबारी, निचलौल,नौतनवा,फरेंदा, बृजमनगंज,पनियरा और बरवा राजा समेत क्षेत्र के विभिन्न गांवों में धान की फसल गिरने की बात सामने आ रही है।
लागत बढ़ी, फसल गिरी तो दोहरी मार
किसानों का कहना है कि खेती की लागत पहले ही लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तैयार फसल के खेतों में गिर जाने से उनकी आर्थिक चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि नुकसान का आकलन समय रहते नहीं किया गया तो वास्तविक क्षति का आंकलन करने में भी परेशानी हो सकती है।
स्थलीय सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग
किसान नरेंद्र भारती, प्रद्युम्न पांडेय, नागेंद्र प्रसाद, भभूति दीक्षित, संजय पटेल, सुनील गुप्ता, घनश्याम गुप्ता, मुन्नी पटेल, रामा वर्मा, जोखमन वर्मा, नंदू वर्मा, बासुदेव यादव, संदीप, हरिकेश, संदीप राव, उमेश चौधरी, अशोक चौधरी, अमरनाथ चौधरी और मनोज गुप्ता समेत अन्य किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र स्थलीय सर्वे कराने की मांग की है।
किसानों ने कहा कि बारिश और तेज हवा से जिन खेतों में फसल को नुकसान हुआ है, उसका निष्पक्ष आकलन कराया जाए। साथ ही नियमानुसार सहायता अथवा मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदा से हुए आर्थिक नुकसान के बीच किसानों को राहत मिल सके।





















