*महेशपुर–परासी–सुनवल सड़क निर्माण में भारी देरी, भड़के लोग—जाम कर जताया विरोध
*देरी से बढ़ा हादसों का खतरा, धूल-कीचड़ से बेहाल जनजीवन
रिपोर्ट/विप्लव मद्धेशिया
ठूठीबारी/महराजगंज
पश्चिम नवलपरासी में महेशपुर मुख्य भन्सार नाका को जोड़ने वाली महेशपुर–परासी–सुनवल सड़क का स्तरोन्नति कार्य गंभीर देरी का शिकार हो गया है। निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार से नाराज स्थानीय लोग अब आंदोलन के रास्ते पर उतर आए हैं। बुधवार को युवाओं ने महेशपुर–हरपुर खंड में करीब दो घंटे तक सड़क जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया और संबंधित निकाय व निर्माण कंपनी का ध्यान आकर्षित किया।
सूचना बोर्ड के अनुसार इस सड़क परियोजना को 26 अक्तूबर 2024 तक पूरा होना था, लेकिन तय समयसीमा बीतने के बाद भी काम 35 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका है। सड़क डिवीजन कार्यालय बुटवल ने लगभग 21 करोड़ 11 लाख 38 हजार 666 रुपये की लागत से इस परियोजना का ठेका दिया था। गौरीशंकर हिमालयन कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. ने 26 अप्रैल 2023 को अनुबंध करते हुए निर्धारित समय में कार्य पूरा करने का वादा किया था, जो अब अधूरा साबित हो रहा है।
निर्माण में देरी का सीधा असर स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। सड़क पर लगातार उड़ रही धूल से घरों, दुकानों और रसोई तक में गंदगी फैल रही है, वहीं लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धूल के कारण सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। वहीं बरसात के दौरान सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे आवागमन बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर कई दुकानों को हटाया गया और लोगों ने बेहतर सड़क की उम्मीद में अपने मकानों के हिस्से तक तोड़ दिए। लेकिन निर्माण अधूरा रहने से अब वे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेल रहे हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “घर भी गया, दुकान भी गई, लेकिन सड़क आज तक नहीं बन पाई।”
महेशपुर–हरपुर खंड के करीब 1.5 किलोमीटर हिस्से में तीन साल बाद भी कार्य पूरा नहीं होने से लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वार्ता कर समाधान नहीं निकाला गया तो वे सड़क को पूरी तरह बंद करने के लिए बाध्य होंगे।
यह सड़क महेशपुर नाका से जिला मुख्यालय परासी होते हुए पूर्व–पश्चिम राजमार्ग से जुड़ती है, जो सीमावर्ती व्यापार, यात्रियों की आवाजाही और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में पहले ही चरण में देरी से पूरी परियोजना के वर्षों तक लटकने की आशंका गहरा गई है।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति सार्वजनिक करने, नियमित निगरानी सुनिश्चित करने और धूल नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय करने की मांग की है। उनका कहना है कि कभी-कभी पानी का छिड़काव किया जाता है, लेकिन वाहनों के दबाव के चलते धूल फिर उड़ने लगती है।
इधर, सड़क की खराब स्थिति के कारण हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को एक मोटरसाइकिल चालक के घायल होने की घटना सामने आई है, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार इस तरह की दुर्घटनाएं अब आम हो गई हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “सड़क सुधार के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डाल दी गई है।”
सूचना बोर्ड पर दर्शाई गई समयसीमा और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सरकारी निगरानी तंत्र और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों ने नई सरकार से इस परियोजना पर तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य को तेजी से पूरा कराने की मांग की है।




















