सुरक्षा रही,आदेश गायब! RTI में महराजगंज पुलिस के जवाब पर उठे सवाल
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महराजगंज। सम्पादक अम्बिका दत्त चौबे/ उप सम्पादक उमेश चौरसिया
सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में महराजगंज पुलिस का उत्तर अब चर्चा का विषय बन गया है। हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य नरसिंह पाण्डेय द्वारा अपने आवास पर लगाई गई पुलिस सुरक्षा से संबंधित अभिलेख मांगे जाने पर पुलिस विभाग ने ऐसा जवाब दिया है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नौतनवा के सरोजिनी नगर वार्ड निवासी नरसिंह पाण्डेय ने जन सूचना अधिकारी एवं अपर पुलिस अधीक्षक, महराजगंज से वर्ष 2025 में उनके आवास पर उपलब्ध कराई गई पुलिस सुरक्षा का पूरा विवरण मांगा था। उन्होंने पूछा था कि सुरक्षा कब से कब तक प्रदान की गई, इसे लगाने एवं हटाने का आदेश किस अधिकारी द्वारा जारी किया गया तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों का विवरण क्या है। जान-माल के संभावित खतरे का हवाला देते हुए उन्होंने धारा 7(1) के अंतर्गत निर्धारित समयावधि में सूचना उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया था।
इस संबंध में नौतनवा थाने से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट में बताया गया कि उनके आवास पर 16 सितंबर 2025 से 24 अक्टूबर 2025 तक पुलिस सुरक्षा तैनात रही। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े आदेशों की प्रमाणित प्रतियां मांगे जाने पर पुलिस ने उत्तर दिया कि संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं।
यही नहीं, सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के नाम एवं पदनाम की जानकारी मांगे जाने पर सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(g) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया गया। विभाग का तर्क था कि इस प्रकार की सूचना सार्वजनिक होने से संबंधित कर्मियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। पुलिस के इस जवाब के बाद कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। यदि सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में लागू की गई थी तो उसके आदेश, स्वीकृति अथवा संबंधित अभिलेख विभागीय रिकॉर्ड में क्यों उपलब्ध नहीं हैं। वहीं सुरक्षा प्रदान किए जाने और समाप्त किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पूर्व जिलाध्यक्ष नरसिंह पाण्डेय ने पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना को अधूरा, भ्रामक और आरटीआई की मूल भावना के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि सरकारी संसाधनों और पुलिस बल की तैनाती से जुड़े मामलों का स्पष्ट अभिलेख होना चाहिए तथा नागरिकों को उसकी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
उन्होंने बताया कि प्राप्त उत्तर से संतुष्ट न होने के कारण अब वह प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। इस मामले ने एक बार फिर सरकारी अभिलेखों के रख-रखाव, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है।





















