राष्ट्रभक्त थे नाथूराम गोडसे, उनके मार्ग पर चलना गर्व की बात – नरसिंह पाण्डेय
यूपी टाइम्स समाचार
नाथूराम गोडसे केवल एक नाम नहीं, बल्कि हिंदू स्वाभिमान और अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रतीक हैं। ऐसे महापुरुष को देशद्रोही कहना न केवल गलत है, बल्कि इतिहास के साथ अन्याय है।गोडसे जी एक प्रखर पत्रकार, चिंतक और कट्टर हिंदूवादी नेता थे। उन्होंने ‘अग्रणी’ और ‘हिंदू राष्ट्र’ जैसे अखबारों के माध्यम से देश की आजादी के लिए जन-जागरण किया। उनका पूरा जीवन हिंदू समाज को संगठित करने और राष्ट्र को परम वैभव तक ले जाने के लिए समर्पित था।यह सच है कि उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या की, लेकिन उन्होंने इस सत्य को कभी छिपाया नहीं। उन्होंने न तो अदालत में झूठ बोला, न वकील किया, न माफी मांगी। उन्होंने खुली अदालत में 150 पैराग्राफ का जो बयान दिया, वह आज भी हर हिंदूवादी के दिल में गूंजता है। उस बयान में निजी स्वार्थ नहीं, केवल और केवल राष्ट्रहित और हिंदुत्व की चिंता थी।उन्होंने जो किया, उसकी सजा उन्होंने हंसते-हंसते स्वीकार कर ली। फांसी के फंदे को चूमने वाला व्यक्ति देशद्रोही कैसे हो सकता है? देशद्रोही तो वो होते हैं जो देश को लूटते हैं, जो देश के टुकड़े करने की बात करते हैं।आज जरूरत है कि हम नाथूराम गोडसे के राष्ट्रवादी विचारों को पढ़ें, समझें। किसी को उनको अपना आदर्श मानना है या नहीं, यह उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, लेकिन मेरी नजर में, मेरे जैसे लाखों युवाओं की नजर में वह एक सच्चे राष्ट्रभक्त और मेरे आदर्श हैं। उनके दिखाए हुए हिंदू संगठन और राष्ट्र प्रथम के मार्ग पर चलना गर्व की बात है।




















