सुल्तानपुर बीएसए का तुगलकी फरमान, क्या पारदर्शिता से डर रहा शिक्षा विभाग
बलवन्त पाण्डेय ब्यूरो चीफ
(यूपी टाइम्स समाचार सुल्तानपुर)
जनपद सुल्तानपुर में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) उपेंद्र गुप्ता द्वारा जारी एक आदेश ने शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है। बीएसए ने पत्रांक संख्या बेसिक/41236-4/2025-26, दिनांक 26 फरवरी 2026 के माध्यम से सभी परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के विद्यालय अवधि में किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश न दिया जाए।
आदेश में कहा गया है कि विद्यालय के मुख्य द्वार, चारदीवारी अथवा परिसर में स्पष्ट रूप से सूचना अंकित कराई जाए कि बिना अनुमति प्रवेश वर्जित है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कठोर दंडात्मक एवं विधिक कार्रवाई की जाएगी। अनुपालन में शिथिलता बरतने पर प्रधानाध्यापकों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
शासनादेश का हवाला नहीं, सवालों के घेरे में आदेश
इस आदेश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी शासनादेश या उच्च स्तरीय निर्देश का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निर्णय व्यक्तिगत स्तर पर लिया गया है? शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि विद्यालय सार्वजनिक संस्थान हैं और अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा मीडिया की वैध पहुंच को पूरी तरह प्रतिबंधित करना पारदर्शिता के विपरीत माना जा सकता है।
हालिया विवादों के बाद आया आदेश
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में विभाग से जुड़े कई विवाद सामने आए थे। लंभुआ क्षेत्र के एक विद्यालय में बच्चों को कथित रूप से कक्ष में बंद किए जाने का वीडियो वायरल हुआ था, जिससे विभाग की किरकिरी हुई। वहीं कादीपुर क्षेत्र के एक प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने का वीडियो भी चर्चा में रहा। इन घटनाओं के बाद विभाग पर सवाल खड़े हुए थे।
आलोचकों का कहना है कि ऐसे समय में बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूर्ण रोक का आदेश जारी करना संदेह पैदा करता है। उनका सवाल है कि क्या यह कदम जवाबदेही तय करने के बजाय निगरानी को सीमित करने की कोशिश है?
*शिक्षक संगठनों में नाराजगी*
शिक्षक संगठनों के कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि यदि विद्यालयों में व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो स्पष्ट दिशा-निर्देश शासन स्तर से आने चाहिए। बिना व्यापक परामर्श के ऐसे आदेश लागू करना उचित नहीं है।
हालांकि, विभागीय सूत्रों का तर्क है कि यह कदम विद्यालयों में अनावश्यक हस्तक्षेप रोकने और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अब देखना होगा कि इस आदेश पर जिला प्रशासन या शासन स्तर से कोई स्पष्टीकरण आता है या नहीं। फिलहाल, बीएसए का यह आदेश जनपद में चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है।





















