नए शैक्षिक सत्र के पहले ही दिन परिषदीय विद्यालयों की खुली पोल,कहीं लटका मिला ताला तो कहीं छात्रों की बेहद कम उपस्थिति
Up Times Samachar
महराजगंज। उप संपादक: उमेश चौरसिया
सर्व शिक्षा अभियान के तहत नए शैक्षिक सत्र 2026-27 के पहले दिन बुधवार को मिठौरा ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों का यूपी टाइम्स समाचार के संवाददाता द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कई विद्यालयों में लापरवाही,समय पालन में कमी तथा छात्रों की बेहद कम उपस्थिति जैसी स्थितियां सामने आईं, जिससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर हो गई। प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत को लेकर व्यापक तैयारियों और “स्कूल चलो अभियान” के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद कई विद्यालयों में पहले ही दिन व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई।
औचक निरीक्षण की शुरुआत पूर्व माध्यमिक विद्यालय दरहटा से की गई। सुबह लगभग 8:10 बजे विद्यालय का मुख्य गेट बंद मिला और उस पर ताला लटका हुआ था। इस दौरान कुछ बच्चे विद्यालय के बाहर खड़े होकर शिक्षकों के आने का इंतजार करते दिखाई दिए।थोड़ी देर बाद शिक्षक मौके पर पहुंचे, जिसके बाद विद्यालय का ताला खोला गया और बच्चों को अंदर प्रवेश दिया गया।
इसके बाद प्राथमिक विद्यालय दरहटा का निरीक्षण सुबह 8:11 बजे किया गया। यहां विद्यालय खुला मिला तथा कुछ शिक्षक और छात्र मौजूद थे। विद्यालय परिसर में कक्षाओं के संचालन की तैयारी होती दिखाई दी। इसी क्रम में प्राथमिक विद्यालय पकड़ियार खुर्द का निरीक्षण सुबह 8:15 बजे किया गया। यहां विद्यालय खुला मिला और शिक्षक भी उपस्थित थे। कुछ छात्र भी विद्यालय पहुंचे हुए थे तथा शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी चल रही थी।अंत में प्राथमिक विद्यालय नगर पंचायत चौक, गुरु गोरक्षनाथ वार्ड नंबर-15 का निरीक्षण सुबह 8:27 बजे किया गया। यहां विद्यालय समय से खुला मिला और अध्यापक भी मौजूद थे,लेकिन छात्रों की संख्या बेहद कम दिखाई दी, जिससे “स्कूल चलो अभियान” की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते नजर आए।
नए शैक्षिक सत्र के पहले ही दिन किए गए इस औचक निरीक्षण से स्पष्ट हुआ कि कई परिषदीय विद्यालयों में समय पालन,शिक्षकों की समय से उपस्थिति तथा छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अभी भी गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है। सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं,लेकिन जमीनी स्तर पर इन प्रयासों का असर अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विद्यालयों में समय से शिक्षक उपस्थित हों और नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हों, तो निश्चित ही छात्रों की उपस्थिति में भी सुधार होगा और सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर अभिभावकों का भरोसा मजबूत होगा।





















